अध्याय 189

लेकिन मीरा के दिमाग में बस यही चल रहा था कि कल उसे चादरें फिर से धोनी पड़ेंगी।

वह बगल वाले घर की ओर चलते-चलते अपना फोन निकालती है और नई चादरों के कुछ सेट और ड्यूवेट कवर ऑर्डर कर देती है।

डिलीवरी का समय देखकर लगा कि ये कल ही आ जाएंगे।

पिछले कुछ दिनों से मौसम भी ठीक नहीं था—हवा में सीलन-सी रहती थी...

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